Chief Justice Surya Kant भारतीय न्यायपालिका के एक प्रतिष्ठित और प्रेरणादायक न्यायाधीश हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, ज्ञान और न्यायप्रियता के बल पर देश के सर्वोच्च न्यायालय तक का सफर तय किया है। वे हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ा गांव के मूल निवासी हैं और भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में नियुक्त हुए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भारतीय न्याय व्यवस्था में एक नया अध्याय लिखा है और वे हरियाणा के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो इस उच्चतम न्यायिक पद पर पहुंचे हैं।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
सूर्यकांत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिसार में प्राप्त की और बाद में कानून की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने हरियाणा विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और तत्पश्चात वकालत की दुनिया में कदम रखा। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें जल्द ही एक कुशल और प्रभावशाली वकील के रूप में स्थापित किया। सूर्यकांत ने अपनी वकालत के दौरान कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों को संभाला, जिससे उनका नाम न्याय क्षेत्र में तेजी से फैलने लगा।
न्यायिक सफर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत को उनके तर्कशील और न्यायप्रिय दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2006 में हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला। बाद में उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। उनके न्यायिक कार्यों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। 2017 में उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति
अक्टूबर 2023 में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। यह हरियाणा के लिए एक गौरव का क्षण था क्योंकि वे राज्य के पहले मुख्य न्यायाधीश बने। उनकी नियुक्ति ने देश की न्यायपालिका में विविधता और प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया। मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने न्याय के त्वरित और निष्पक्ष वितरण को प्राथमिकता दी और न्यायिक सुधारों के लिए कई पहलें शुरू कीं।
न्यायपालिका में योगदान
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए, जो समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। वे महिला अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों के कट्टर समर्थक रहे हैं। उनके फैसले समाज में न्याय की भावना को मजबूत करने वाले माने जाते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने न्यायपालिका के आधुनिककरण और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।
व्यक्तित्व और नेतृत्व
सूर्यकांत का व्यक्तित्व सरल, गंभीर और न्यायप्रिय है। वे अपने सहयोगियों और अधिवक्ताओं के साथ सम्मान और समर्पण के साथ पेश आते हैं। उनके नेतृत्व में न्यायपालिका ने न केवल अपनी साख बढ़ाई है बल्कि आम जनता का न्याय पर विश्वास भी मजबूत हुआ है। वे एक ऐसे न्यायाधीश हैं जो कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जीवन और कार्य हमें यह सिखाते हैं कि कठिन परिश्रम, समर्पण और नैतिकता से कोई भी व्यक्ति देश की सर्वोच्च सेवा कर सकता है। वे भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक प्रेरणा हैं और उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल हैं। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि किसी भी छोटे गांव के व्यक्ति के लिए भी सपने सच हो सकते हैं, बशर्ते वे निरंतर मेहनत करें और न्याय की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहें।

