Prehistoric Period (Before 2500 BCE): प्रागैतिहासिक काल की रोचक दुनिया! पत्थर युग से कृषि तक का मानव विकास सफर

Prehistoric Period (Before 2500 BCE): प्रागैतिहासिक काल की रोचक दुनिया! पत्थर युग से कृषि तक का मानव विकास सफर

Prehistoric Period (Before 2500 BCE): प्रागैतिहासिक काल मानव इतिहास का वह महत्वपूर्ण चरण है जिसमें लिखित इतिहास नहीं था और इंसान अपने जीवन के लिए पत्थरों और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करता था। यह काल मुख्य रूप से पत्थर युग (Stone Age) के रूप में जाना जाता है, जो तीन प्रमुख संस्कृतियों में विभाजित है: पैलियोलिथिक (Paleolithic), मेसोलिथिक (Mesolithic), और नियोलिथिक (Neolithic)। इस काल में मानव ने अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए उपकरण बनाए, भोजन के नए स्रोत खोजे और प्रारंभिक आवासों का निर्माण किया।

पत्थर युग की संस्कृतियां

  1. पैलियोलिथिक युग (पुरापाषाण काल):
    यह सबसे पुराना और लंबा काल था, जो लगभग 2.5 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ। इस युग में मनुष्य मुख्यतः शिकारी और संग्रहकर्ता थे। वे सरल पत्थर के औजार बनाते थे जिनका उपयोग शिकार करने, भोजन काटने और वस्तुओं को बनाने में करते थे। इस समय मनुष्य गुफाओं में रहता था और आग का उपयोग करना सीख चुका था। यह युग मानव जीवन के विकास की शुरुआत था।

  2. मेसोलिथिक युग (मध्यपाषाण काल):
    यह काल पैलियोलिथिक और नियोलिथिक युग के बीच का था। इस समय मानव ने अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना शुरू किया। वे अब छोटी-छोटी बस्तियां बसाने लगे और औजारों में सुधार हुआ। नए औजार जैसे तीर और धनुष बने। उन्होंने भोजन में मछली पकड़ने और जंगली फसलों को इकट्ठा करने पर ध्यान देना शुरू किया। इससे मानव जीवन में स्थिरता आई।

  3. नियोलिथिक युग (नवपाषाण काल):
    यह काल मानव जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। इस युग में कृषि की शुरुआत हुई, जिससे इंसान स्थायी बस्तियों में रहने लगा। वे पशुपालन और खेती करने लगे। नियोलिथिक युग के औजार पहले के मुकाबले अधिक उन्नत और पॉलिश्ड थे। इस युग में मिट्टी के बर्तन, कपड़े बुनने और जल संरक्षण के उपाय भी विकसित हुए।

महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल

  • भिमबेटका (मध्य प्रदेश):
    यह स्थल अपनी प्राचीन गुफा चित्रकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां के गुफाओं में मानव जीवन के प्रारंभिक स्वरूप, शिकार, नृत्य और दैनिक जीवन की झलक मिलती है। भिमबेटका के निशान इस बात के साक्ष्य हैं कि यहां मानव सभ्यता का विकास हजारों वर्ष पहले हुआ था।

  • हुंसी (कर्नाटक):
    यह स्थल दक्षिण भारत के प्रागैतिहासिक सभ्यता का प्रतिनिधित्व करता है। यहां के अवशेषों से पता चलता है कि हुंसी में मेसोलिथिक और नियोलिथिक काल की बस्तियां विकसित हुईं।

  • बेलन घाट (उत्तर प्रदेश):
    बेलन घाट में नहरों और जल स्रोतों के पास कृषि की शुरुआत के संकेत मिले हैं। यह स्थल नियोलिथिक काल की कृषि व्यवस्था और स्थायी बस्तियों का उदाहरण है।

  • मेहरगढ़ (पाकिस्तान):
    मेहरगढ़ दक्षिण एशिया का सबसे पुराना कृषि स्थल माना जाता है। यहां से प्राप्त मिट्टी के बर्तन, औजार और आवासीय संरचनाएं नियोलिथिक युग की उन्नत सभ्यता को दर्शाती हैं।

औजार, भोजन और प्रारंभिक बस्तियां

प्रागैतिहासिक काल में मानव ने पत्थर के विभिन्न औजार बनाए जैसे- कटिंग ब्लेड, छीलने वाले उपकरण, चाकू, भाला आदि। पैलियोलिथिक काल के औजार बहुत ही सरल और बिना पॉलिश के होते थे जबकि नियोलिथिक काल में ये औजार पॉलिश्ड और अधिक उपयोगी बने।

भोजन के लिए वे मुख्यतः शिकार, मछली पकड़ना, जंगली फल, बीज और जड़ियां खाते थे। नियोलिथिक काल में कृषि के कारण अनाज और पशुपालन शुरू हुआ जिससे भोजन का स्थायी स्रोत मिला। प्रारंभिक बस्तियों का निर्माण नदी किनारे या जल स्रोतों के पास हुआ, जहां इंसान एक साथ समूह में रहते थे।

प्रागैतिहासिक काल मानव जीवन के विकास की आधारशिला है। इस काल में पत्थर युग की तीन संस्कृतियों ने इंसान को जंगली जीवन से कृषि और स्थायी आवास की ओर अग्रसरित किया। महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों जैसे भिमबेटका, हुंसी, बेलन घाट और मेहरगढ़ ने मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरण को समझने में मदद की है। ये काल मानव इतिहास की वह धरोहर है जिसने भविष्य की सभ्यता की नींव रखी।

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