Indian Constitution: कैसे बना भारत का संविधान! इतिहास, निर्माण और संविधान की प्रमुख विशेषताएं

Indian Constitution: कैसे बना भारत का संविधान! इतिहास, निर्माण और संविधान की प्रमुख विशेषताएं

Indian Constitution: भारतीय संविधान भारत का सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोच्च कानून है। यह संविधान भारत के शासन और प्रशासन की नींव है। संविधान के माध्यम से भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बना है। संविधान ने देश के नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए हैं और सरकार के ढांचे को परिभाषित किया है। इसे समझना हर भारतीय के लिए आवश्यक है।

भारतीय संविधान का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय संविधान की नींव कई ऐतिहासिक घटनाओं और आंदोलनों से जुड़ी है। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में कई सुधार हुए और भारतीयों ने स्वराज की मांग तेज की। 1935 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट संविधान के लिए एक आधारशिला साबित हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में स्वाधीनता आंदोलन तेज हुआ और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद भारत को एक नया संविधान चाहिए था जो देश के विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समेटे।

संविधान निर्माण और संविधान सभा

भारतीय संविधान को बनाने के लिए संविधान सभा का गठन 1946 में किया गया। इस सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान समिति का अध्यक्ष बनाया गया। संविधान सभा ने लगभग 2 वर्षों, 11 महीनों और 18 दिनों तक मेहनत करके 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंतिम रूप दिया। यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ जिसे हम ‘गणतंत्र दिवस’ के रूप में मनाते हैं।

संविधान के स्रोत

भारतीय संविधान कई देशों के संविधान से प्रेरित होकर बनाया गया है। इसमें ब्रिटेन के संसदीय प्रणाली, अमेरिका के अधिकारों का बिल, कनाडा के संघीय ढांचे और ऑस्ट्रेलिया के न्यायपालिका के विचार शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय परंपराओं का भी संविधान में बड़ा योगदान है।

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भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ

  1. लिखित संविधान: भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है।

  2. संघीय ढांचा: केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा।

  3. लोकतांत्रिक गणराज्य: जनता द्वारा चुनी गई सरकार।

  4. संपूर्ण अधिकार: नागरिकों को मौलिक अधिकार और कर्तव्य।

  5. धर्मनिरपेक्ष: सभी धर्मों को समान मान्यता।

  6. न्यायपालिका की स्वतंत्रता: संविधान के अनुसार न्यायपालिका स्वतंत्र है।

  7. संशोधन की व्यवस्था: समय-समय पर आवश्यकतानुसार संविधान में बदलाव।

प्रस्तावना: अर्थ, उद्देश्य और महत्व

भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान का परिचय और उद्देश्य बताती है। प्रस्तावना में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्रदान करना है। प्रस्तावना में ‘हम, भारत के लोग’ शब्द से यह जाहिर होता है कि सत्ता का स्रोत जनता है।

प्रस्तावना संविधान के मूल सिद्धांतों को संक्षेप में प्रस्तुत करती है और यह नागरिकों को संविधान के प्रति प्रतिबद्ध करती है। यह लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।