R. K. Narayan (1906-2001) भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य के सबसे प्रमुख और सम्मानित लेखकों में से एक थे। उनका पूरा नाम रत्ना कृष्णन नारायण था। उन्होंने अपनी सरल भाषा और जीवंत कथाओं के जरिए भारतीय जीवन के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को बड़े खूबसूरती से उकेरा। नारायण की लेखनी ने भारत की एक छोटे शहर की जिंदगी को अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुँचाया और उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
आर. के. नारायण का जीवन परिचय
आर. के. नारायण का जन्म 10 अक्टूबर 1906 को मद्रास प्रेसीडेंसी (अब तमिलनाडु) के मैसूर में हुआ था। उनके परिवार में साहित्य और शिक्षा का खासा माहौल था। नारायण की शिक्षा भी वहीं हुई और उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में गहरी रुचि विकसित की। वे शुरू से ही लेखन की ओर आकर्षित थे।
उनकी रचनाएँ भारतीय समाज की रोजमर्रा की जिंदगी को दर्शाती हैं। उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों के लिए एक काल्पनिक शहर “मालगुड़ी” बनाया, जो अब भारतीय अंग्रेजी साहित्य में एक प्रसिद्ध नाम बन गया है। मालगुड़ी के माध्यम से नारायण ने आम आदमी की ज़िंदगी, उसकी खुशियाँ, दुख और संघर्ष को बड़ी सहजता से प्रस्तुत किया।
साहित्यिक योगदान
आर. के. नारायण के कई उपन्यास और कहानियाँ पढ़ने वालों के दिल को छू गईं। उनके प्रमुख उपन्यासों में “मालगुड़ी डेज़,” “स्वामी और उसके मित्र,” “गाइड,” और “द बैटल ऑफ़ द सेक्सेज़” शामिल हैं। उनकी लेखनी में सरलता, सूक्ष्म व्यंग्य और मानवीय संवेदनाएँ झलकती हैं।
उनकी सबसे चर्चित कृति “गाइड” पर आधारित एक फिल्म भी बनी जो भारतीय सिनेमा के महान कार्यों में गिनी जाती है। नारायण की कहानियों में न तो किसी बड़े संघर्ष या हिंसा की झलक मिलती है और न ही कोई बहुत बड़ा नाटक। वे जीवन के छोटे-छोटे पहलुओं को गहराई से पकड़ते थे और उसमें मानवीय भावना की झलक देते थे।
साहित्यिक पुरस्कार और सम्मान
आर. के. नारायण को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए कई पुरस्कार मिले। उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्हें भारत सरकार के साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाज़ा गया। उन्होंने भारतीय साहित्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान-सम्मान दिलाया।
राज्यसभा सदस्य के रूप में योगदान
साहित्य के अलावा, आर. के. नारायण ने भारत की राजनीति में भी योगदान दिया। वे 1989 से 1995 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने साहित्य, शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वे अपने शांत स्वभाव और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते थे।
प्रभाव और विरासत
आर. के. नारायण की रचनाएँ आज भी पढ़ी जाती हैं और भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं। उनकी कहानियाँ भारतीय जीवन की सादगी और सुंदरता को दर्शाती हैं। नारायण ने यह दिखाया कि बड़े से बड़े विषय को भी सरल और मनमोहक भाषा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
उनकी रचनाएँ स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, जिससे नई पीढ़ी भी भारतीय संस्कृति और जीवन के बारे में जान पाती है। वे भारत के उन लेखकों में से थे जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधताओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
आर. के. नारायण सिर्फ एक लेखक ही नहीं बल्कि भारतीय साहित्य के दिग्गज थे जिन्होंने अपनी सरल भाषा और दिल को छू लेने वाली कहानियों से विश्व साहित्य में अपना अमिट स्थान बनाया। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका योगदान भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। आज भी उनकी कहानियाँ भारतीय जीवन की झलकियां हमें सिखाती हैं और प्रेरित करती हैं। उनका साहित्य भारतीय साहित्य की समृद्ध विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है।

