Nelson Mandela: नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और विश्वप्रसिद्ध नेता थे। उनका जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के उमुखुम्बा जिले में हुआ था। मंडेला ने रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी और दक्षिण अफ्रीका में शांति, समानता और न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
रंगभेद के खिलाफ संघर्ष
मंडेला ने रंगभेद के अत्याचारों का विरोध किया और अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) के नेता के रूप में जनजागरण किया। उन्होंने अशांतिपूर्ण आंदोलन और कभी-कभी सशस्त्र संघर्ष का सहारा लेकर अपने देश को दमन से मुक्त कराने का प्रयास किया। उनकी इस लड़ाई के कारण उन्हें 27 साल जेल में बिताने पड़े।
27 साल की कैद और मुक्ति
कैद के बावजूद मंडेला ने कभी हार नहीं मानी। जेल में रहते हुए भी वे रंगभेद के अंत और लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करते रहे। 1990 में उनकी रिहाई के बाद, मंडेला ने शांति और मेल-मिलाप का मार्ग चुना। उन्होंने अपने देश में नस्लभेद खत्म करने और एक समतामूलक समाज बनाने का लक्ष्य रखा।
दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति
1994 में दक्षिण अफ्रीका में पहली बार सभी जाति और रंग के लोगों के लिए स्वतंत्र चुनाव हुए। नेल्सन मंडेला निर्वाचित होकर देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। उन्होंने सभी दक्षिण अफ्रीकियों के लिए समान अधिकारों और अवसरों की नींव रखी।
विश्व शांति के लिए योगदान
मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मानवाधिकार, समानता और शांति के लिए काम किया। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। वे आज भी विश्व के सबसे प्रेरणादायक नेताओं में गिने जाते हैं।
मंडेला की विरासत
नेल्सन मंडेला की जिंदगी संघर्ष, साहस, और क्षमा का उदाहरण है। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति अपने धैर्य और दृढ़ निश्चय से बड़े बदलाव ला सकता है। उनका जीवन आज भी दुनिया भर में आज़ादी, समानता और मानवाधिकार की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणा है।
नेल्सन मंडेला एक ऐसा नाम है जो समानता और न्याय की लड़ाई का पर्याय बन चुका है। उनकी शिक्षाएँ और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हैं। उनकी याद में हर साल 18 जुलाई को ‘मंडेला दिवस’ मनाया जाता है, जो सेवा और समाज के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

