Indian Military Bases Outside India: भारत, एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में, अपनी रणनीतिक पहुंच को देश की सीमाओं से बाहर भी बढ़ा रहा है। देश के बाहर सैन्य अड्डे या सुविधाएं स्थापित करने से भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, अपने हितों की रक्षा करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखाने में मदद मिलती है। ये विशेष रूप से भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को अपनी संचालन क्षमता बनाए रखने और क्षेत्रीय स्थिरता को समर्थन देने में सक्षम बनाती हैं। नीचे भारत के बाहर स्थित प्रमुख सैन्य अड्डों और रणनीतिक सुविधाओं की विस्तृत सूची दी गई है।
1. फर्खोर एयर बेस, ताजिकिस्तान
भारत का अकेला ऐसा सैन्य अड्डा जो देश के बाहर है, वह ताजिकिस्तान के फर्खोर में स्थित है। यह एयर बेस 1990 के दशक के अंत में भारतीय सहायता से स्थापित किया गया था। यह स्थान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया के निकट एक आधार प्रदान करता है। यह बेस मुख्य रूप से भारतीय वायु सेना द्वारा उपयोग किया जाता है और खासतौर पर अफगान युद्ध के दौरान इसके उपयोग की सूचना मिली है।
2. असेम्प्शन द्वीप, सेशेल्स
भारत ने सेशेल्स के असेम्प्शन द्वीप तक पहुंच हासिल कर ली है, जो हिंद महासागर में स्थित है। हालांकि यहाँ अभी तक भारत का पूर्ण सैन्य अड्डा नहीं बना है, लेकिन नौसैनिक सुविधाओं के विकास के लिए समझौते हो चुके हैं। यह रणनीतिक स्थान भारत को समुद्री यातायात की निगरानी, समुद्री डाकू गतिविधियों से मुकाबला करने और पश्चिमी हिंद महासागर में नौसैनिक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा।
3. दुकम पोर्ट, ओमान
ओमान के दुकम पोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वामित्व वाला आधार नहीं है, लेकिन भारतीय नौसेना को यहां के पोर्ट सुविधाओं तक पहुंच मिली है। दुकम, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री संकुचन में से एक है। यहां की पहुंच से भारत को अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र में अपने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने में मदद मिलती है।
4. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में नौसैनिक सुविधाएं
भारत यूएई के साथ सैन्य और नौसैनिक सहयोग बनाए हुए है। हालांकि यहां कोई स्थायी भारतीय सैन्य अड्डा नहीं है, भारतीय नौसेना अक्सर यूएई के बंदरगाहों में डाक करती है और नियमित रूप से संयुक्त अभ्यास आयोजित करती है। इससे भारत को फारस की खाड़ी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सहायता मिलती है, जो ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
5. एंटिगुआ, कैरिबियन (प्रस्तावित)
भारत ने कैरिबियन के एंटिगुआ में सैन्य उपस्थिति या सुविधा स्थापित करने की इच्छा जताई है। हालांकि यहां अभी कोई औपचारिक आधार नहीं है, लेकिन पश्चिमी गोलार्ध में भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए चर्चाएं चल रही हैं, जिससे भारतीय नौसेना और वायु सेना को वैश्विक समुद्री सुरक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
6. अगालेगा द्वीप, मॉरीशस (प्रस्तावित)
भारत मॉरीशस के अगालेगा द्वीपों में एक सैन्य और नौसैनिक अड्डे के विकास की योजना बना रहा है। ये द्वीप हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और समुद्री यातायात की निगरानी और क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बढ़ाने के लिए एक अग्रिम संचालन आधार के रूप में काम कर सकते हैं।
रणनीतिक महत्व
भारत के बाहरी सैन्य अड्डे और रणनीतिक साझेदारियां समुद्री संचार के महत्वपूर्ण मार्गों की सुरक्षा में मदद करती हैं, खासकर हिंद महासागरीय क्षेत्र में, जहां से भारत के 80% से अधिक व्यापार गुजरते हैं। ये आधार नौसैनिक और वायु संचालन के लिए लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान करते हैं, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाते हैं और मानवीय व आपदा राहत अभियानों में सहायता करते हैं।
चुनौतियां और कूटनीति
भारत की विदेशों में सैन्य उपस्थिति मेजबान देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने के कूटनीतिक प्रयासों से संतुलित है। विदेशों में सैन्य सुविधाओं के विस्तार को सावधानीपूर्वक किया जाता है ताकि क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को उत्तेजित न किया जाए और भूराजनीतिक संतुलन बिगड़े, खासकर चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के संदर्भ में।
भारत के विदेशों में सैन्य अड्डे और रणनीतिक सुविधाएं उसकी बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षाओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। जैसे-जैसे हिंद महासागर एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, भारत की बाहरी सैन्य पहुंच भी बढ़ती जाएगी, जिससे वह क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करेगा।

