Jhelum River: जम्मू और कश्मीर राज्य की जीवनरेखा के रूप में सबसे प्रमुख नदी जमुनी नदी या अधिक प्रसिद्ध नाम से झेलम नदी मानी जाती है। यह नदी जम्मू और कश्मीर की समृद्धि, कृषि, जल आपूर्ति और सामाजिक-आर्थिक जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। झेलम नदी की विशेष भूमिका और महत्व को समझना जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और सांस्कृतिक समृद्धि को समझने के लिए आवश्यक है।
झेलम नदी का स्रोत और मार्ग
झेलम नदी का उद्गम स्थल कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध वनों में स्थित वासुकी ताल (गोपीनाथ पर्वत के निकट) है। यह नदी कश्मीर घाटी के हृदय से होकर बहती है। इसके बाद यह जम्मू और कश्मीर के विभिन्न जिलों से होकर गुजरती है और अंततः पाकिस्तान में प्रवेश कर सिंधु नदी में मिल जाती है। झेलम नदी का कुल लंबा मार्ग लगभग 725 किलोमीटर है, जो जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान दोनों के लिए जल स्रोत प्रदान करता है।
झेलम नदी का महत्व
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कृषि के लिए जीवनरेखा: झेलम नदी के पानी का उपयोग जम्मू और कश्मीर की घाटी में कृषि के लिए किया जाता है। कश्मीर घाटी की उपजाऊ भूमि इस नदी की सिंचाई से समृद्ध होती है। यहाँ की मशहूर सेब की खेती, धान, मक्का और अन्य फसलों के लिए झेलम नदी का पानी अत्यंत आवश्यक है।
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जल विद्युत उत्पादन: झेलम नदी पर कई जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित हैं, जो जम्मू और कश्मीर को विद्युत ऊर्जा प्रदान करती हैं। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में ऊर्जा की कमी को काफी हद तक पूरा किया गया है और स्थानीय विकास में सहायता मिली है।
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पेयजल और जीवन की आधारशिला: झेलम नदी का जल स्थानीय लोगों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। यह नदी जीवन का आधार होने के साथ-साथ पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक है।
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सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व: झेलम नदी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी बहुत बड़ा है। कई धार्मिक स्थल इसके किनारे बसे हैं और स्थानीय लोगों की जीवनशैली में यह नदी एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
झेलम नदी की चुनौतियाँ
हालांकि झेलम नदी जम्मू और कश्मीर के लिए जीवनदायिनी है, लेकिन यह कई पर्यावरणीय और मानवीय चुनौतियों का सामना भी करती है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और अवैध निर्माण के कारण नदी प्रदूषित हो रही है। इसके अलावा, जल स्तर में कमी और नदी के तटीय क्षेत्र में वनस्पति और जीव-जंतुओं के आवास घटने से जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
संरक्षण के प्रयास
स्थानीय सरकार और पर्यावरण संगठन झेलम नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए कई योजनाएं चला रहे हैं। नदी की सफाई, जल संरक्षण, और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं ताकि झेलम नदी अपनी जीवनरेखा की भूमिका को और प्रभावी ढंग से निभा सके।
जम्मू और कश्मीर की जीवनरेखा के रूप में झेलम नदी का स्थान अतुलनीय है। यह न केवल क्षेत्र की कृषि और जल आपूर्ति का आधार है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जीवन शैली का भी अभिन्न हिस्सा है। झेलम नदी की सुरक्षा और संरक्षण न केवल जम्मू-कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस जीवनदाता नदी की कृपा से लाभान्वित हो सकें।

