State Government: भारत में राज्य सरकार संविधान के अनुसार राज्यों के प्रशासन और विकास के लिए जिम्मेदार होती है। राज्य सरकार की संरचना चार मुख्य अंगों से मिलकर बनी होती है — राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मंत्रिमंडल, राज्य विधायिका (विधान सभा एवं विधान परिषद), और राज्य न्यायपालिका। इस लेख में हम इनके अधिकार, कर्तव्य और कार्यप्रणाली पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे।
राज्यपाल: अधिकार और कार्य
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार का प्रतिनिधि माना जाता है। उनका कार्य है राज्य के संवैधानिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना। राज्यपाल को विभिन्न प्रकार के अधिकार प्राप्त हैं:
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नियुक्ति अधिकार: वे मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रिमंडल, राज्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आदि की नियुक्ति करते हैं।
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विधायी अधिकार: वे विधानसभा को भंग करने, बिल को मंजूरी देने या उसे वापस भेजने का अधिकार रखते हैं।
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अनुशासनात्मक अधिकार: वे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं, जैसे राज्यपाल शासन लगाना।
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अन्य कार्य: राज्यपाल सलाहकार मंडल के रूप में कार्य करता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर कई निर्णय लेता है।
राज्यपाल की भूमिका मुख्यत: एक समन्वयक और निगरानी करने वाले की होती है, जो संविधान की मर्यादा बनाए रखे।
मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल
मुख्यमंत्री राज्य सरकार का कार्यकारी प्रमुख होता है। उन्हें आमतौर पर विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन द्वारा चुना जाता है। मुख्यमंत्री सरकार के निर्णयों को लागू करता है और सभी विभागों का संचालन करता है।
मंत्रिमंडल में विभिन्न विभागों के मंत्री होते हैं, जो मुख्यमंत्री के नेतृत्व में काम करते हैं। वे नीति निर्धारण, योजना क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। मुख्यमंत्री तथा मंत्री परिषद एक समन्वित टीम की तरह काम करती है जो राज्य के विकास और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध होती है।
राज्य विधायिका: विधानसभा और परिषद
राज्य विधायिका दो सदनों में हो सकती है — विधानसभा (विधान सभा) और परिषद (विधान परिषद)।
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विधान सभा: यह राज्य की मुख्य विधायी संस्था होती है, जिसके सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं। विधानसभा राज्य के कानून बनाने, बजट पारित करने और सरकार की निगरानी करने का कार्य करती है। विधानसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है।
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विधान परिषद: कुछ राज्यों में विधान परिषद भी होती है जो एक अपर सदन की तरह काम करती है। इसका सदस्य चयन प्रक्रिया अधिक जटिल होती है और यह विधायी प्रक्रिया में समीक्षा का काम करती है।
विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना, सरकार की जवाबदेही तय करना और राज्य के संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना होता है।
राज्य न्यायपालिका
राज्य की न्यायपालिका राज्य उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों से मिलकर बनती है। उच्च न्यायालय राज्य में कानून की व्याख्या और न्यायिक विवादों का निपटारा करता है। यह संविधान के तहत स्वतंत्र होता है।
अधीनस्थ न्यायालय जिला न्यायालय, तहसील न्यायालय आदि शामिल होते हैं, जो आम जनता के न्याय के लिए काम करते हैं। न्यायपालिका कानून का पालन सुनिश्चित करती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।
राज्य सरकार का ढांचा संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित है। राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हुए भी मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के नेतृत्व में कार्य करते हैं। राज्य विधायिका कानून बनाती है और न्यायपालिका कानून के पालन में मदद करती है। यह चारों अंग मिलकर राज्य के सुशासन और विकास को सुनिश्चित करते हैं।

